Search This Blog

Creditor Management

क्रेडिटर मैनेजमेंट (Creditor Management) – हिंदी में

क्रेडिटर मैनेजमेंट का अर्थ है व्यवसाय द्वारा लेनदारों / आपूर्तिकर्ताओं (Creditors) के भुगतान को समय पर, नियंत्रित और योजनाबद्ध तरीके से प्रबंधित करना।


क्रेडिटर (Creditor) कौन होता है?

क्रेडिटर वह व्यक्ति या संस्था होती है, जिससे व्यवसाय ने

  • उधार पर माल खरीदा हो, या
  • सेवाएँ / ऋण (Loan) लिया हो,
    और जिसका भुगतान अभी बाकी हो।

क्रेडिटर मैनेजमेंट का महत्व

  • 🤝 आपूर्तिकर्ताओं से अच्छे संबंध बनाए रखता है
  • 📈 व्यवसाय की साख (Credit Reputation) बढ़ाता है
  • 💸 अनावश्यक जुर्माने व कानूनी समस्याओं से बचाता है
  • 📊 नकदी प्रवाह (Cash Flow) को संतुलित करता है

क्रेडिटर मैनेजमेंट के मुख्य उद्देश्य

  1. समय पर भुगतान सुनिश्चित करना
  2. क्रेडिट अवधि का अधिकतम लाभ उठाना
  3. व्यवसाय की विश्वसनीयता बनाए रखना
  4. कैश फ्लो को प्रभावी रूप से नियंत्रित करना

क्रेडिटर मैनेजमेंट की प्रमुख विधियाँ

1. भुगतान शर्तों को समझना

क्रेडिट अवधि, ब्याज, छूट (Discount) और भुगतान की तिथि स्पष्ट रखें।

2. क्रेडिटर लेजर बनाए रखना

हर क्रेडिटर का अलग रिकॉर्ड और बकाया राशि का सही विवरण।

3. भुगतान की प्राथमिकता तय करना

किस क्रेडिटर को पहले भुगतान करना है, यह तय करना।

4. कैश फ्लो प्लानिंग

भुगतान इस तरह करें कि व्यवसाय की नकदी प्रभावित न हो।

5. समय पर भुगतान

देरी से भुगतान करने से बचें ताकि व्यापारिक संबंध मजबूत रहें।


निष्कर्ष

अच्छा क्रेडिटर मैनेजमेंट व्यवसाय को
✔ स्थिर
✔ विश्वसनीय
✔ दीर्घकालिक रूप से सफल
बनाता है।

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!