डेब्टर मैनेजमेंट (Debtor Management)
डेब्टर मैनेजमेंट का अर्थ है व्यवसाय में उधार (क्रेडिट) पर सामान या सेवाएँ लेने वाले ग्राहकों से समय पर पैसा वसूलने की प्रक्रिया को सही तरीके से प्रबंधित करना।
डेब्टर (Debtor) कौन होता है?
डेब्टर वह व्यक्ति या संस्था होती है, जिसने व्यवसाय से उधार में सामान या सेवाएँ ली हों और जिसके ऊपर भुगतान बकाया हो।
डेब्टर मैनेजमेंट का महत्व
- 💰 समय पर नकद प्राप्ति (Cash Flow बेहतर होता है)
- 🧾 खराब कर्ज (Bad Debts) से बचाव
- 📊 व्यवसाय की वित्तीय स्थिति मजबूत रहती है
- 🤝 ग्राहक के साथ अच्छा संबंध बना रहता है
डेब्टर मैनेजमेंट के मुख्य उद्देश्य
- समय पर भुगतान प्राप्त करना
- क्रेडिट जोखिम को कम करना
- बकाया राशि को नियंत्रित रखना
- नकदी प्रवाह (Cash Flow) बनाए रखना
डेब्टर मैनेजमेंट की प्रमुख विधियाँ
1. क्रेडिट पॉलिसी बनाना
ग्राहक को कितना और कितने समय के लिए उधार देना है, यह पहले तय करना।
2. क्रेडिट योग्यता की जांच
ग्राहक की आर्थिक स्थिति, भुगतान इतिहास और विश्वसनीयता की जांच करना।
3. समय पर इनवॉइस जारी करना
बिल या इनवॉइस तुरंत और सही विवरण के साथ जारी करना।
4. भुगतान की नियमित फॉलो-अप
फोन कॉल, ई-मेल या रिमाइंडर के माध्यम से भुगतान की याद दिलाना।
5. बकाया का रिकॉर्ड रखना
डेब्टर लेजर और एजिंग एनालिसिस (Debtors Ageing) बनाए रखना।
6. सख्त वसूली नीति
अधिक देरी होने पर कानूनी या औपचारिक कार्रवाई करना।
निष्कर्ष
डेब्टर मैनेजमेंट व्यवसाय की रीढ़ है। सही डेब्टर प्रबंधन से व्यवसाय में नकदी की कमी नहीं होती और लाभ में वृद्धि होती है।